सामाजिक कुकृत्य

 समाजिक कुकृत्य की

पुरज़ोर आलोचना करता वो

 घूमता रहा

गली -चौराहों पर

सामाजिक समानता और

मानवाधिकार का समर्थक बन !


धार्मिक मुद्दों पर अपनी 

आलोचनात्मक तर्क देकर

वो हर जगह अपनी छवि

एक बुद्धिजीवी सा बनाता गया


पर वो चूक गया

जब उसकी बारी 

उस दुर्दांत और निरंकुश नेता

 की आलोचना की आयी 

जिसके नाम के आगे

उसका सरनेम लगा था!


     विधान

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