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सामाजिक कुकृत्य

 समाजिक कुकृत्य की पुरज़ोर आलोचना करता वो  घूमता रहा गली -चौराहों पर सामाजिक समानता और मानवाधिकार का समर्थक बन ! धार्मिक मुद्दों पर अपनी  आलोचनात्मक तर्क देकर वो हर जगह अपनी छवि एक बुद्धिजीवी सा बनाता गया पर वो चूक गया जब उसकी बारी  उस दुर्दांत और निरंकुश नेता  की आलोचना की आयी  जिसके नाम के आगे उसका सरनेम लगा था!      विधान

जादूगर कहाँ है!

 जादूगर कहाँ है! इस वक्त जब उसकी सबसे आधिक जरूरत है क्यों उसने दिखाने बंद कर रखे है अपने करतब! तमाम धर्मों के ठेकेदारों अब कहाँ हो तुम! कहो अपने ईश्वरों से उसकी जरूरत है अब इंसानों को सर्वाधिक! पूछो-   क्या वो यही चाहता है कि न बचे एक भी सर  उसके दर पर झुककर उसकी इबादत करने को! राजाओं को लिखों ख़त पूछो- किस काम की हैं उनकी  ऑक्सिजन के डिब्बे माफ़िक़ दिखने वाली मिसाइलें! क्या नहीं आ सकती किसी काम में    उनकी अत्याधुनिक बंदूकें पूछो- किस लिए हैं तैनात  हमारी जान की रक्षा में उनकी तोपें! कब तक देखते रहोगे मौत का तमाशा कब तक  इन हत्याओं पर मौन रहोगे!   विधान